जशपुरनगर, 22 मई 2026।
जशपुर जिले के मनोरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम धसमा में ‘अवैध रेत खनन’ को लेकर सुर्खियों में आए मामले का सच अब सामने आ गया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित “बहती नदी से तरक्की, धरसा की लावा नदी से रोज निकाल रहे 50 ट्रैक्टर रेत” की खबर के बाद जब प्रशासनिक टीम धसमा गाँव पहुँची, तो ज़मीनी हकीकत कुछ और ही निकली। ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई इस जांच में यह साफ़ हुआ है कि वहाँ कोई व्यावसायिक या अवैध उत्खनन नहीं हो रहा था, बल्कि ग्रामीण अपने आशियाने के लिए रेत ले जा रहे थे।
आशियाना बनाने की जद्दोजहद, रोज़ाना 50 ट्रैक्टर का दावा निकला अफवाह
जांच के दौरान ग्रामवासियों ने खुलकर अपनी बात सामने रखी। ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो सप्ताह पहले उन्होंने अपने प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत स्वीकृत पक्के मकानों के निर्माण के लिए गाँव के पास से गुजरने वाली लावा नदी से रेत निकाली थी।
ग्रामीणों ने समाचार में किए गए दावों को खारिज करते हुए कहा कि नदी से रोज़ाना 50 ट्रैक्टर रेत निकालने की बात पूरी तरह गलत है। गरीब ग्रामीण सिर्फ अपने घरों को पूरा करने के लिए ज़रूरत के मुताबिक रेत ला रहे थे। वर्तमान में नदी से किसी भी प्रकार की रेत नहीं निकाली जा रही है और मौके पर जांच टीम को भी अवैध उत्खनन या परिवहन का कोई सबूत नहीं मिला।
खदान को लेकर क्या है प्रशासनिक स्थिति?
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, लावा नदी के रातामाटी क्षेत्र में रेत खदान 2 फरवरी 2024 से 1 फरवरी 2026 तक आधिकारिक रूप से स्वीकृत थी। इस लीज की अवधि पूरी होने के बाद, अब आगामी 3 वर्षों के लिए उत्खनिपट्टा (Mining Lease) की स्वीकृति, अनुबंध निष्पादन और पंजीयन की कानूनी प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
जन-सरोकार का चश्मा: क्यों ज़रूरी था यह स्पष्टीकरण?
इस पूरे मामले में एक बात साफ़ है कि ग्रामीण इलाकों में जब सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं (जैसे पीएम आवास) के तहत मकान बनते हैं, तो स्थानीय स्तर पर संसाधनों की ज़रूरत पड़ती है। अखबारों में छपी खबर ने इसे ‘अवैध रेत माफिया’ का रूप दे दिया था, लेकिन जांच में यह साफ हो गया कि यह मामला किसी माफिया का नहीं बल्कि ग्रामीणों की अपनी बुनियादी ज़रूरत से जुड़ा था। फिलहाल नदी में पूरी तरह शांति है और किसी भी प्रकार का व्यावसायिक दोहन नहीं पाया गया है।
