दुर्ग और बिलासपुर में मामले सामने आने के बाद जशपुर में सतर्कता बढ़ी; बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ को नजरअंदाज न करने की अपील।
जशपुरनगर (छत्तीसगढ़), 15 सितंबर 2026
प्रदेश के विभिन्न जिलों में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। दुर्ग और बिलासपुर सहित अन्य जिलों में संक्रमण के मामले दर्ज होने के बाद जशपुर जिले में भी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जी. एस. जात्रा ने जिलेवासियों से सतर्क रहने और रोकथाम के आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, H1N1 एक संक्रामक श्वसन रोग है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने अथवा निकट संपर्क में आने से तेजी से फैलता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय पर सावधानी और चिकित्सकीय देखभाल से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
इन प्रमुख लक्षणों को न करें नजरअंदाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि सामान्य मौसमी फ्लू जैसे लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत जांच करानी चाहिए:
- तेज बुखार, लगातार खांसी और गले में खराश।
- नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द और बदन दर्द।
- अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।
- गंभीर लक्षण: सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या सांस फूलना जैसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां
- हाथों की स्वच्छता: साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं। बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
- मास्क और रूमाल का प्रयोग: खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रूमाल से ढकें।
- भीड़भाड़ से दूरी: सर्दी, खांसी या बुखार होने पर सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
- पर्याप्त वेंटिलेशन: घर और कार्यस्थल पर खिड़कियां खुली रखें और हवा की आवाजाही (वेंटिलेशन) सुनिश्चित करें।
- स्वयं दवा लेने से बचें: डॉक्टर के परामर्श के बिना किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें।
संवेदनशील वर्ग रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से किसी गंभीर या दीर्घकालिक बीमारी (जैसे डायबिटीज, हृदय रोग, दमा) से पीड़ित व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। इस वर्ग में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है, इसलिए लक्षण दिखते ही तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना अनिवार्य है।
CMHO डॉ. जी. एस. जात्रा ने कहा कि सभी शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। नागरिक अफवाहों पर ध्यान न दें और लक्षण महसूस होने पर घरेलू नुस्खों या नीम-हकीमों के चक्कर में पड़ने के बजाय नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराएं।
