द्वारका के यशोभूमि में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री करेंगे तीन दिवसीय वैश्विक महाकुंभ का उद्घाटन; ‘सिलिकॉन से सिस्टम’ तक संपूर्ण इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर।
नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026
वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स परिदृश्य में दूसरे सबसे बड़े मोबाइल निर्माता के रूप में अपनी धाक जमाने के बाद, भारत अब सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि (द्वारका) में तीन दिवसीय भव्य आयोजन SEMICON India 2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। दुनिया की शीर्ष चिप कंपनियों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की मौजूदगी में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भारत की तकनीकी संप्रभुता और ‘ग्लोबल चिप पावरहाउस’ बनने की महत्वाकांक्षा का बड़ा गवाह बनेगा।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना” रखी गई है, जो स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल फैब्रिकेशन (चिप निर्माण) तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, सप्लाई चेन और प्रतिभा विकास का एकीकृत आधार तैयार कर चुका है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति से सेमीकंडक्टर तक का सफर
करीब एक दशक पहले तक देश का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र काफी सीमित था, लेकिन संरचनात्मक सुधारों और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) नीतियों ने तस्वीर बदल दी:
- इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन: वित्त वर्ष 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2025-26 तक 13.11 लाख करोड़ रुपये (करीब 7 गुना वृद्धि) पर पहुंच गया।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात: 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये (लगभग 11 गुना वृद्धि) दर्ज किया गया।
- स्मार्टफोन में ऐतिहासिक उछाल: मोबाइल फोन उत्पादन 18,000 करोड़ से बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये (33 गुना) और निर्यात 1,500 करोड़ से बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये (165 गुना) हुआ। आज देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2% फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं, जिससे स्मार्टफोन देश का नंबर-1 निर्यात उत्पाद बन चुका है।
सेमीकॉन 1.0 और 2.0: धरातल पर उतरे कारखाने
भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए बहु-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया है:
- वित्तीय प्रावधान: वर्ष 2021 में शुरू हुए ‘सेमीकॉन 1.0’ (76,000 करोड़ रुपये) की सफलता के बाद, जुलाई 2026 में कैबिनेट ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के आवंटन के साथ सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी।
- जमीनी निवेश: 6 राज्यों में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 12 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें सिलिकॉन फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और आधुनिक पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। तीन संयंत्रों में वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
डिजाइन प्रतिभा का वैश्विक केंद्र बना भारत
चिप निर्माण के साथ-साथ देश ने अपनी बौद्धिक क्षमता (IP) विकसित करने पर भी बड़ा दांव लगाया है:
- 85,000 इंजीनियरों का लक्ष्य: दशक के अंत तक वर्कफोर्स तैयार करने के मिशन के तहत 320 उच्च शिक्षण संस्थानों को आधुनिक EDA टूल्स से लैस किया गया है और 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
- ChipIN Centre की वैश्विक मिसाल: C-DAC द्वारा संचालित इस साझा सुविधा का लाभ 500 से अधिक संस्थानों के 1 लाख से ज्यादा इंजीनियर उठा चुके हैं। यहां से 300 से अधिक चिप डिजाइन तैयार हुए हैं, जिनमें उन्नत 12 नैनोमीटर चिप्स भी शामिल हैं।
Pax Silica: वैश्विक सप्लाई चेन में रणनीतिक भागीदारी
भारत की रणनीति केवल घरेलू मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है। वर्ष 2026 के ‘India AI Impact Summit’ के दौरान भारत आधिकारिक तौर पर अमेरिका और सहयोगी देशों के साथ Pax Silica गठबंधन में शामिल हुआ। इसका उद्देश्य सिलिकॉन सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड एआई हार्डवेयर पर लोकतांत्रिक देशों का सुरक्षित और स्वतंत्र नियंत्रण बनाए रखना है, ताकि भविष्य की तकनीक किसी आर्थिक दबाव का जरिया न बन सके।
यशोभूमि में जुटेगी दुनिया
SEMICON India 2026 के तीन दिवसीय आयोजन में 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 600 से अधिक प्रदर्शक और 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल होंगी। आयोजन में 6 देशों और 12 राज्यों के विशेष पवेलियन के अलावा स्टार्टअप शोकेस, तकनीकी हैकाथॉन और महिला फोरम की विशेष भागीदारी रहेगी। यह आयोजन वैश्विक मंच पर भारत के इस आत्मविश्वास का प्रमाण है कि भविष्य की दुनिया को चलाने वाली सिलिकॉन तकनीक अब भारत की धरती पर गढ़ी जा रही है।
