जल संरक्षण से लेकर सड़क, स्कूल, पंचायत भवन, आजीविका, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन तक के कार्य शामिल
रायपुर, 20 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के तहत अब अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि अनुमेय कार्यों की संख्या बढ़ने से गांवों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और ग्रामीण अधोसंरचना मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में ऐसी स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी किया जाएगा, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।
3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया गया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है।
रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को ग्रामीण विकास से जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और गांवों के समग्र विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
चार मुख्य श्रेणियों में 375 कार्य
वीबी-जीरामजी के तहत अनुमेय 375 कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य और 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य शामिल हैं। समूह एवं सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य भी इस सूची का हिस्सा हैं।
ग्रामीणों को इन कार्यों की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए राज्य में क्यूआर कोड जारी किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

2027 तक 6,671 बालिका शौचालय बनाने का लक्ष्य
वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य किए जा सकेंगे।
इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके तहत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
6,524 गांवों में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय
ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में कार्य जारी है।
वीबी-जीरामजी के तहत श्मशान घाट और अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से जुड़े निर्माण एवं मरम्मत कार्य भी अनुमेय किए गए हैं। इसके अलावा राज्य के 10 हजार से अधिक बंद या डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण की योजना है।
जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर जोर
पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल और सिंचाई कुएं जैसे कार्य शामिल हैं।
इसके साथ माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चैनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण और रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे। इनका उद्देश्य जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना है।
सड़क, पंचायत भवन और स्कूलों की अधोसंरचना होगी मजबूत
दूसरी मुख्य श्रेणी ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया, क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय और सार्वजनिक भवन शामिल हैं।
स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान जैसे कार्य भी अनुमेय होंगे। इसके अलावा श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग और परिवहन शेड जैसी सामुदायिक सुविधाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य और जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
आजीविका के लिए ग्रामीण स्तर पर तैयार होगा आधार
तीसरी मुख्य श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न एवं कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं विकसित की जा सकेंगी।
इसके अलावा स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर के भवन, वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र, पशु आश्रय, मत्स्य पालन अधोसंरचना, नर्सरी एवं पौधरोपण तथा भवन निर्माण सामग्री के उत्पादन से जुड़े कार्य भी अनुमेय होंगे।
कृषि एवं स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा
कृषि आधारित प्रसंस्करण को भी अनुमेय कार्यों में स्थान दिया गया है। इसके तहत मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, एकीकृत कृषि प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प प्रसंस्करण, जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण और बांस शिल्प से संबंधित अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
महिला स्व-सहायता समूहों को भी मिलेगा लाभ
स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह स्तर की गतिविधियों के लिए आवश्यक अधोसंरचना को अनुमेय कार्यों में शामिल किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं विकसित करने के अवसर बढ़ेंगे।
वर्मी कम्पोस्ट, नर्सरी, कृषि उत्पाद भंडारण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।
आपदा प्रबंधन और चरम मौसम से निपटने के कार्य भी शामिल
चौथी मुख्य श्रेणी में अति विषम मौसमी घटनाओं के न्यूनीकरण और आपदा सजगता से जुड़े कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें चक्रवात आश्रय, बाढ़ आश्रय, तटबंध, मिट्टी एवं गेबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, लेवल बेंच टेरेस, अपलैंड बेंच टेरेस और स्थिरीकरण तालाब जैसे कार्य शामिल हैं।
आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन, विंडब्रेक एवं शेल्टरबेल्ट पौधरोपण तथा वन अग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्य भी अनुमेय होंगे। वन अग्नि प्रबंधन के तहत फायर ब्रेक हेज, वन अग्नि रेखा और फ्यूल बफर जोन जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि वीबी-जीरामजी को केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका उद्देश्य गांवों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय आजीविका को मजबूत करने और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करने से भी जुड़ा है। 375 अनुमेय कार्यों के माध्यम से रोजगार, परिसंपत्ति निर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ते हुए विकसित गांव की दिशा में आधार तैयार किया जा रहा है।
