मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की ‘बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ प्रदेश के मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। इस योजना ने उन उपभोक्ताओं की बड़ी चिंता दूर कर दी है, जिनके बिजली बिल सालों से लंबित थे और भारी सरचार्ज (अधिभार) के कारण भुगतान करना नामुमकिन लग रहा था। ताजा मामला सरगुजा जिले के मैनपाट का है, जहां एक ग्रामीण को सीधे 14 हजार रुपये से अधिक की बड़ी राहत मिली है।
42 हजार का बिल और धनंजय की बढ़ती चिंता
मैनपाट विकासखंड के ग्राम पथरई निवासी श्री धनंजय तिवारी का बिजली बिल लंबे समय से बकाया होने के कारण बढ़कर 42,900 रुपये से ऊपर पहुंच गया था। एक साधारण परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम एकमुश्त जमा करना बेहद मुश्किल था। धनंजय आर्थिक रूप से परेशान थे और बिल कटने के डर में जी रहे थे।
योजना ने दिया राहत का ‘करंट’
समाधान शिविर की जानकारी मिलते ही धनंजय ने आवेदन किया। योजना के तहत उनके बिल से 14,700 रुपये का सरचार्ज माफ कर दिया गया। इतना ही नहीं, शेष बची हुई राशि को भरने के लिए उन्हें आसान किस्तों की सुविधा भी दी गई।
राहत मिलने के बाद धनंजय तिवारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा, “भारी बिल की वजह से मैं बहुत तनाव में था। इस योजना ने न सिर्फ मेरा बोझ कम किया, बल्कि मुझे किस्तों में पैसे जमा करने की सहूलियत भी दी। यह योजना हम जैसे आम लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा है।”
सरगुजा जिले में 28 करोड़ की मिली छूट
विद्युत विभाग के आंकड़े बताते हैं कि यह योजना जिला स्तर पर बड़े बदलाव ला रही है:
- कुल पात्र उपभोक्ता: सरगुजा के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 62,175 उपभोक्ता इस योजना के दायरे में हैं।
- बड़ी राहत: जिले में अब तक 28.06 करोड़ रुपये से अधिक की सरचार्ज छूट दी जा चुकी है।
- सुगम भुगतान: कुल 91.88 करोड़ रुपये की बकाया राशि के विरुद्ध, भारी छूट के बाद उपभोक्ताओं को अब केवल 20.70 करोड़ रुपये की भुगतान योग्य राशि का विकल्प दिया गया है।
घर के पास शिविर, मौके पर समाधान
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, दूरस्थ अंचलों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इन शिविरों में बिजली संबंधी शिकायतों का मौके पर ही निपटारा हो रहा है, जिससे उपभोक्ताओं में नया उत्साह देखा जा रहा है। सरकार की इस पहल से न केवल लोगों का आर्थिक बोझ कम हुआ है, बल्कि वे अब नियमित बिजली बिल भुगतान के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं।
