जशपुर:
राष्ट्रीय अभियान ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0’ (MRMA 2.0) के तहत जशपुर जिले के विभिन्न तसर बहुल क्षेत्रों में 1 से 3 सितंबर तक किसानों के लिए जागरूकता, तकनीकी प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक-किसान संवाद कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आधुनिक व वैज्ञानिक तकनीकों को धरातल पर उतारकर तसर उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाना है।
₹2 के DFL से ₹250 के कोकून: आर्थिक संभावनाओं पर जोर
प्रशिक्षण सत्रों के दौरान किसानों को तसर रेशम पालन की आर्थिक मजबूती का गणित समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर न्यूनतम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। किसानों को उदाहरण देकर स्पष्ट किया गया कि यदि लगभग ₹2 प्रति रोगमुक्त अंड समूह (DFL) के खर्च पर वैज्ञानिक पद्धति से उचित देखरेख की जाए, तो करीब ₹250 मूल्य तक के गुणवत्तापूर्ण कोकून प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय सृजन के बड़े अवसर खुल रहे हैं।
तिथिवार एवं क्षेत्रवार आयोजित गतिविधियां:
- 1 सितंबर (कुनकुरी): ‘तसर में अधिक उत्पादकता के लिए हितधारक आधारित चयन’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें लगभग 50 किसानों को गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज चयन और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
- 2 सितंबर (कटंगखार एवं टांगरगांव): कटंगखार में वैज्ञानिक पालन पद्धतियों पर सत्र हुआ, वहीं टांगरगांव में कीट रोग प्रबंधन पर वैज्ञानिक-किसान संवाद रखा गया। दोनों सत्रों में 50-50 किसानों ने भाग लेकर कीटों में होने वाले रोगों की पहचान, समय पर रोकथाम, नियमित निगरानी और स्वच्छता के उपाय सीखे।
- 3 सितंबर (भितघरा एवं बंधरचुवां): भितघरा में तसर ग्रेनेज की मानक कार्यप्रणाली (SOPs) और बंधरचुवां में विसंक्रमण (Disinfection) व स्वच्छता प्रथाओं पर विशेष कार्यशाला हुई। लगभग 100 किसानों (प्रत्येक केंद्र पर 50) को बीज उत्पादन और संक्रामक बीमारियों से बचाव के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
वैज्ञानिक और मैदानी अमले का सीधा संवाद
इस पूरी श्रृंखला का आयोजन केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB-CTRTI) रांची की वैज्ञानिक-बी डॉ. निधि सुखीजा द्वारा जिला रेशम विभाग के अधिकारियों व क्षेत्रीय कर्मचारियों के समन्वय से किया गया।
कुनकुरी कार्यक्रम में सहायक निदेशक रेशम उद्योग (जशपुर) श्री श्याम कुमार, फील्ड मैन श्री जेवियर टोप्पो, श्री धन साय और श्री संजय कुमार यादव का सक्रिय सहयोग रहा। वहीं कटंगखार, टांगरगांव, भितघरा और बंधरचुवां के कार्यक्रमों में डेमोंस्ट्रेटर श्री राम यादव, ऑपरेटिव श्री ओवैद वर्मा एवं फील्ड ऑफिसर श्री निर्मल करकट्टा ने समन्वय की भूमिका निभाई।
इस तीन दिवसीय अभियान के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद कायम हुआ, जिससे स्थानीय चुनौतियों के समाधान के साथ-साथ जिले में तसर पालन को एक संगठित और लाभदायक व्यवसाय के रूप में नई गति मिली है।
