बस्तर के बीहड़ों और दूरस्थ वनांचलों में बदलाव की गूँज अब साफ़ सुनाई देने लगी है। भैरमगढ़ विकासखंड का छोटा सा ग्राम चिन्ताटोकामेटा आज विकास की एक ऐसी मिसाल बनकर उभरा है, जहाँ जल जीवन मिशन ने दशकों पुरानी प्यास बुझाकर ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया रंग भर दिया है।
”कभी पानी के लिए पूरा दिन बीत जाता था, कभी नदी का मटमैला पानी मजबूरी थी। पर आज जब घर के आँगन में नल खुला, तो लगा जैसे हमारी मेहनत सफल हो गई।” — एक ग्रामीण महिला
संघर्ष से सुविधा तक का सफर
कुछ समय पहले तक चिन्ताटोकामेटा की तस्वीर आज से बिल्कुल जुदा थी। गांव की महिलाओं और बच्चों का आधा दिन सिर्फ पानी के इंतजाम में बीत जाता था। पूरा गांव या तो एक इकलौते हैंडपंप पर निर्भर था या फिर लंबी दूरी तय कर नदी से पानी लाने को मजबूर था। लंबी कतारें, घंटों का इंतज़ार और शारीरिक श्रम ने ग्रामीणों की दिनचर्या को कठिन बना दिया था।
12 परिवारों की बदली दुनिया
जल जीवन मिशन के तहत योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए गांव के सभी 12 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ा गया है। अब स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सीधे उनके घर की दहलीज तक पहुँच रहा है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जलजनित बीमारियों के खतरे में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
जल उत्सव: जब गांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणित
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए 19 मार्च 2026 को गांव में ‘जल उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामसभा के माध्यम से चिन्ताटोकामेटा को आधिकारिक रूप से “हर घर जल” प्रमाणित गांव घोषित किया गया।
- जागरूकता अभियान: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया।
- सहभागिता: ग्रामीणों को जलकर के भुगतान और सप्लाई सिस्टम के रखरखाव की ट्रेनिंग दी गई ताकि यह व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू रूप से चल सके।
