जशपुर में जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान का केंद्र बनेगा ‘वनांचल विज्ञान केन्द्र’, पीसीसीएफ अरुण पाण्डेय ने लिया तैयारियों का जायजा

  • पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख का दो दिवसीय जशपुर दौरा, तपकरा और पण्ड्रापाट में मैदानी अमले के साथ की समीक्षा बैठक
  • झरगांव में प्रस्तावित वनांचल विज्ञान केन्द्र के स्थल का किया स्थलीय निरीक्षण
  • वन व वन्यजीव सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश

रायपुर / जशपुर (16 सितम्बर 2026):

छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय ने 15 और 16 सितम्बर को जशपुर वनमण्डल का दो दिवसीय दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वन एवं वन्यजीव संरक्षण, वनाग्नि नियंत्रण, पौधरोपण जैसी मैदानी गतिविधियों की समीक्षा की तथा जशपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम झरगांव में प्रस्तावित ‘वनांचल विज्ञान केन्द्र’ के निर्माण की तैयारियों का मौके पर जाकर मुआयना किया।

जशपुर की वन संपदा और लोक ज्ञान से जुड़ेगा विज्ञान केंद्र

प्रवास के दूसरे दिन 16 सितम्बर को पीसीसीएफ श्री पाण्डेय ने ग्राम झरगांव पहुंचकर प्रस्तावित वनांचल विज्ञान केन्द्र के चयनित स्थल का अवलोकन किया। उन्होंने स्थल की भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क, उपलब्ध भूमि और भविष्य के विस्तार की संभावनाओं की समीक्षा की।

श्री पाण्डेय ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रस्तावित केंद्र को जशपुर की विशिष्ट जैव विविधता, समृद्ध प्राकृतिक संपदा, दुर्लभ स्थानीय वनस्पतियों और पारंपरिक ज्ञान से जोड़कर विकसित किया जाए। यह केंद्र न केवल पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक धरोहर के संवर्धन का माध्यम बने, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक व जागरूकता केंद्र के रूप में भी उभरे।

स्थल निरीक्षण के उपरांत वनमण्डल कार्यालय जशपुर के सभागार में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें केंद्र की अवधारणा, अधोसंरचना, थीम आधारित प्रदर्शनियों और स्थानीय वनोपज के समावेश पर विस्तृत रणनीति बनाई गई।

तपकरा और पण्ड्रापाट में मैदानी कार्यों की समीक्षा

इससे पहले, 15 सितम्बर को श्री पाण्डेय ने तपकरा वन परिक्षेत्र और सन्ना वन परिक्षेत्र अंतर्गत पण्ड्रापाट का सघन दौरा किया। मैदानी अधिकारियों व कर्मचारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मैदानी अमला अपने-अपने बीट में लगातार गश्त करे, वन्यजीवों के मूवमेंट पर कड़ी नजर रखे और ग्रामीणों व स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बनाकर काम करे, ताकि मानव-वन्यजीव द्वंद्व को रोका जा सके। साथ ही, उन्होंने विभागीय योजनाओं को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में ये रहे मौजूद

समीक्षा बैठक एवं स्थल निरीक्षण के दौरान मुख्य वन संरक्षक श्री दिलराज प्रभाकर, डीएफओ (जशपुर) श्री शशि कुमार, एसडीओ (वन) श्री करण सिंह, एसडीएम श्री विश्वास राव महस्के, कल्याण आश्रम के महामंत्री श्री योगेश बापट सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *