धमतरी: गंगरेल बांध के 7 गेट खोले गए, महानदी में छोड़ा जा रहा 42,540 क्यूसेक पानी; तटीय गांवों में अलर्ट जारी

जलाशयों में जलभराव 97% के पार, कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नागरिकों से की सतर्क रहने और तेज बहाव से दूर रहने की अपील

धमतरी: जिले एवं कैचमेंट (जलग्रहण) क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख जलाशयों में पानी की भारी आवक दर्ज की जा रही है। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए धमतरी जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गंगरेल (पंडित रविशंकर शुक्ल) बांध के 7 गेट खोलकर 42,540 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के कारण महानदी के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए नदी किनारे बसे तटीय गांवों और बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

रुद्री बैराज से महानदी में 37 हजार क्यूसेक बहाव

गंगरेल बांध से छोड़े जा रहे कुल 42,540 क्यूसेक पानी में से रुद्री बैराज के माध्यम से लगभग 37,000 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में और 5,500 क्यूसेक पानी महानदी मुख्य नहर में प्रवाहित किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है, तो पानी की निकासी की मात्रा को आवश्यकतानुसार और बढ़ाया जा सकता है।

जिले के प्रमुख जलाशयों की स्थिति (13 सितंबर, सुबह 8 बजे तक):

  • गंगरेल जलाशय: 97.16% भरा (आवक: 40,390 क्यूसेक)
  • मुरुमसिल्ली जलाशय: 99.47% भरा (आवक: 1,804 क्यूसेक)
  • दुधावा जलाशय: 94.83% भरा (आवक: 4,009 क्यूसेक)
  • सोदुर जलाशय: 76.58% भरा (आवक: 118 क्यूसेक)

मैदानी अमला 24 घंटे तैनात, मुनादी के निर्देश

महानदी में बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए राजस्व, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के मैदानी अमले को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। तटीय क्षेत्रों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

सावधानी ही सुरक्षा: कलेक्टर अबिनाश मिश्रा

कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “नागरिक उफनते नदी-नालों, रपटों और पुल-पुलियों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें। तेज बहाव में पैदल या वाहन से पार करने का अनावश्यक जोखिम न लें। बच्चों को जलभराव वाले क्षेत्रों में न जाने दें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करें और चिन्हांकित सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचें।”

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