महासमुंद, 19 सितंबर 2026 — आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। स्व-सहायता समूहों (SHG) के सहयोग से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सक्षम हो रही हैं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन स्तर को भी बेहतर बना रही हैं। इसी क्रम में महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम पुरुषोत्तमपुर की श्रीमती कुन्ती निषाद की सफलता की कहानी अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। कुन्ती निषाद ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) से जुड़कर कृषि, टेंट हाउस, कैटरिंग और मछली पालन के जरिए अपनी पारिवारिक आय को कई गुना बढ़ाते हुए ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में अपनी पहचान दर्ज कराई है।
सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह से मिला वित्तीय संबल
कुन्ती निषाद ग्राम पुरुषोत्तमपुर के सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं, जिसमें कुल 10 महिलाएं शामिल हैं। समूह की अध्यक्ष श्रीमती मानकी सिदार और सचिव श्रीमती चन्द्रिका साहू के कुशल नेतृत्व में समूह ने आजीविका संवर्धन के कई कदम उठाए हैं।
समूह को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन की ओर से निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्रदान की गई:
- रिवॉल्विंग फंड (RF): ₹15,000 की शुरुआती सहायता।
- कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF): व्यवसाय शुरू करने हेतु ₹60,000 की राशि।
- बैंक लिंकेज: आजीविका विस्तार के लिए तृतीय किस्त के रूप में ₹3,00,000 का ऋण।
इस वित्तीय सहयोग ने समूह की महिलाओं को जोखिम लेने और नए ग्रामीण उद्यम शुरू करने का मजबूत आधार दिया।
बहुआयामी आजीविका मॉडल: कृषि से लेकर टेंट हाउस तक
कुन्ती निषाद ने केवल परंपरागत खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आय के नए स्रोतों को जोड़कर एक टिकाऊ आजीविका मॉडल तैयार किया:
- कृषि एवं पशुपालन: आधुनिक तरीकों से खेती और पशुपालन के जरिए पारिवारिक आमदनी को सुदृढ़ किया।
- टेंट हाउस एवं कैटरिंग व्यवसाय: गांव और आसपास के क्षेत्रों में होने वाले आयोजनों, शादी-विवाह और कार्यक्रमों के लिए टेंट और खानपान सेवाएं शुरू कीं।
- मछली पालन: अतिरिक्त आय के साधन के रूप में मत्स्य पालन को अपनाया, जिससे नियमित नकद प्रवाह सुनिश्चित हुआ।
वार्षिक आय का विवरण
| आय का स्रोत | अनुमानित वार्षिक आय |
| कृषि कार्य एवं संबंधित गतिविधियां | ₹1,75,000 |
| टेंट हाउस एवं कैटरिंग सेवाएं | ₹1,14,000 |
| कुल वार्षिक आय | ₹2,89,000 |
व्यवसाय विस्तार के लिए ट्रैक्टर की खरीद
टेंट हाउस और कैटरिंग के काम में सामान की ढुलाई एक बड़ी चुनौती थी। इसके समाधान और व्यवसाय को गति देने के लिए सरस्वती स्व-सहायता समूह ने बैठक में प्रस्ताव पारित कर ₹2.50 लाख में पुराना ट्रैक्टर खरीदा।
ट्रैक्टर आ जाने से टेंट का भारी सामान दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाना बेहद आसान हो गया। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आई, बल्कि खाली समय में ट्रैक्टर का उपयोग अन्य कृषि व ढुलाई कार्यों में करके समूह के लिए आय का एक नया जरिया भी बन गया।
बिहान योजना ने बदली सामाजिक और आर्थिक दिशा
श्रीमती कुन्ती निषाद का कहना है कि पहले परिवार केवल सीमित कृषि मजदूरी पर निर्भर था, जिससे आर्थिक तंगी बनी रहती थी। बिहान योजना और स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल वित्तीय मदद मिली, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी प्राप्त हुआ। आज उनकी वार्षिक आय लगभग ₹2.89 लाख तक पहुंच चुकी है, जिससे बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार का भविष्य सुरक्षित हुआ है।
