जशपुर | 13 सितंबर 2026:
जशपुर जिले की पारंपरिक हस्तकरघा कला अब आधुनिक तकनीक और बाजार के तालमेल के साथ विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान 2026’ के तहत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण विजन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की रोजगारोन्मुखी नीतियों को धरातल पर उतारते हुए ग्राम घोलेंग में एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। यहां स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम का पेशेवर प्रशिक्षण देकर न सिर्फ हुनरमंद बनाया जा रहा है, बल्कि उत्पादन से जोड़कर उनकी स्थायी आजीविका भी सुनिश्चित की जा रही है।
चार प्रमुख संस्थाओं का साझा प्रयास
घोलेंग में संचालित यह परियोजना जिला प्रशासन, बिहान, आदित्य बिरला ग्रुप और टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल (TSC) के संयुक्त सहयोग से आगे बढ़ रही है। इस सहभागिता का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तराशना और ग्रामीण परिवेश में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के मजबूत साधन तैयार करना है।
35 से 40 परिवारों को मिल रहा प्रशिक्षण, उत्पादन पर भी जोर
केंद्र में आजीविका से पारंपरिक रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों और स्व-सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आधुनिक मशीनों व उन्नत तकनीकों से कपड़ा तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण ले रही महिलाएं अब शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी वस्त्र उत्पाद तैयार करने की बारीकियां सीख रही हैं।
इस केंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां सीखने के साथ-साथ सीधे उत्पादन की व्यवस्था भी की गई है, जिससे प्रशिक्षण पूरा होते ही हुनरमंद हाथों को काम और नियमित आमदनी मिलने लगे।
पारंपरिक कला को मिलेगा व्यापक बाजार
प्रशिक्षण केंद्र में तैयार होने वाले उत्पादों में गुणवत्ता और आधुनिक डिजाइनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वे बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सकें। स्थानीय स्तर पर तैयार हैंडलूम उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है। इससे जशपुर की समृद्ध हस्तकरघा कला को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
सशक्त होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रुकेगा पलायन
स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को सीधे उत्पादन और बिक्री से जोड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर महिलाएं अपने परिवारों का संबल बन रही हैं।
इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं को टेक्सटाइल सेक्टर में कौशल सिखाकर उन्हें जिले में ही स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध होने से क्षेत्र से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
कौशल, उत्पादन और बाजार की इस मजबूत कड़ी के साथ घोलेंग का यह आजीविका केंद्र आने वाले दिनों में जशपुर के पारंपरिक हस्तकरघा को आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन का बड़ा आधार बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
संभावित हेडलाइंस (विकल्प):
- जशपुर में टेक्सटाइल क्रांति: घोलेंग में हैंडलूम प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं, आजीविका के बन रहे नए अवसर
- सेवा संकल्प अभियान 2026: पारंपरिक हथकरघा को मिला आधुनिक तकनीक का साथ, घोलेंग से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर
- हुनर को नई उड़ान: घोलेंग में ट्रेनिंग के साथ उत्पादन भी शुरू, बिहान और आदित्य बिरला ग्रुप के सहयोग से संवर रहा भविष्य
