कवर्धा। किसी भी जिले की तरक्की का पैमाना वहां की सड़कों या इमारतों से ज्यादा वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था से मापा जाता है। छत्तीसगढ़ का कबीरधाम जिला अस्पताल आज इसी बदलाव की जीती-जागती मिसाल बन चुका है। जो अस्पताल कभी महज एक सरकारी केंद्र हुआ करता था, वह आज उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के विजन और डॉक्टरों की निष्ठा से इलाके की ‘हेल्थ लाइफलाइन’ बन गया है।
आंकड़ों की जुबानी, बदलाव की कहानी
साल 2023 से 2025 के बीच के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि अस्पताल ने कितनी लंबी छलांग लगाई है। ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में आने वाले मरीजों की संख्या 1,19,557 से बढ़कर 1,64,712 हो गई है। यह 45 हजार मरीजों का इजाफा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रमाण है जो आम जनता ने सरकारी तंत्र पर जताया है।
सोनोग्राफी: सबसे बड़ी उपलब्धि, जहाँ 800% से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई।
ओपीडी: औसतन हर महीने 13,000 से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पहुंच: छत्तीसगढ़ के साथ-साथ एमपी के सीमावर्ती जिलों (डिंडोरी-मंडला) के लिए भी वरदान।
सोनोग्राफी और सिटी स्कैन: अब गरीब की पहुंच में महंगी जांचें
अक्सर सरकारी अस्पतालों में मशीनों की कमी या तकनीशियनों के न होने की शिकायत रहती है, लेकिन कबीरधाम ने इस धारणा को तोड़ दिया है। 2023 में जहां साल भर में महज 874 सोनोग्राफी हुई थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 7,244 पहुंच गया। जुलाई 2025 से अब तक 1462 लोगों का सिटी स्कैन किया जा चुका है। निजी लैब में हजारों खर्च करने वाला गरीब तबका अब यहां शून्य खर्च पर आधुनिक जांचें करा रहा है।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा का ‘पर्सनल टच’
इस कायाकल्प के पीछे जिले के विधायक और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की सक्रियता सबसे बड़ा कारण रही है। उन्होंने न केवल फंड और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की, बल्कि समय-समय पर फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त रखा। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि आज अस्पताल में हाई-टेक मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है।
”हमारा लक्ष्य सिर्फ अस्पताल की बिल्डिंग सुधारना नहीं, बल्कि मरीज का विश्वास जीतना है। कबीरधाम जिला अस्पताल आज जिस मुकाम पर है, उसका श्रेय वहां के समर्पित स्टाफ और डॉक्टरों को जाता है।”
— एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी
सरहद पार भी पहुंच रही है सेवा की महक
कबीरधाम जिला अस्पताल की साख अब केवल जिले तक सीमित नहीं है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के डिंडोरी और मंडला जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहां इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बेहतर डायग्नोस्टिक्स, मुफ्त दवाइयां और डॉक्टरों के अच्छे व्यवहार ने इसे एक क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र (Regional Health Hub) के रूप में स्थापित कर दिया है।
मानवता और तकनीक का संगम
अस्पताल की इस सफलता में नर्सिंग स्टाफ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भूमिका भी उतनी ही अहम है जितनी डॉक्टरों की। मोतियाबिंद के ऑपरेशनों में हुई बढ़ोत्तरी और बढ़ते हुए प्रसव केस यह बताते हैं कि यहां ‘केयर’ और ‘क्योअर’ (देखभाल और इलाज) दोनों पर बराबर ध्यान दिया जा रहा है।
