‘सबसे दूर-सबसे पहले’ की तर्ज पर जशपुर के वनांचलों में पहुंचा प्रशासन: पहाड़ी कोरवा परिवारों को मौके पर ही मिला राशन कार्ड और पेंशन का तोहफा

जशपुर, 22 मई 2026।

विकास की मुख्यधारा से जो लोग सबसे दूर हैं, उन तक शासन की योजनाएं सबसे पहले कैसे पहुंचें, इसकी एक सार्थक तस्वीर शुक्रवार को जशपुर जिले में देखने को मिली। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए जशपुर जिला प्रशासन ने “जनभागीदारी – सबसे दूर सबसे पहले” अभियान के तहत जिले के अति-दुर्गम और सुदूर गांवों में जन-कल्याण शिविरों का आयोजन किया।

​इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी पात्र ग्रामीण, विशेषकर हमारी विशेष पिछड़ी जनजातियां, शासन की लाभकारी योजनाओं से वंचित न रहें।

इन दूरस्थ गांवों में लगा प्रशासन का डेरा

​प्रशासनिक अमले ने कार्यालयों से बाहर निकलकर सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। अभियान के तहत जिन प्रमुख गांवों में शिविर लगाए गए, उनमें शामिल हैं:

  • जशपुर विकासखंड: ग्राम बाला छापर
  • मनोरा विकासखंड: ग्राम करदना और टांगरडीह
  • पत्थलगांव विकासखंड: ग्राम राजाआमा और कुकुरभूखा
  • बगीचा विकासखंड: ग्राम छिछली ‘अ’
  • दुलदुला विकासखंड: ग्राम मयूरचुंदी

पहाड़ी कोरवा परिवारों के चेहरों पर आई मुस्कान

​इन शिविरों का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र की विशेष पिछड़ी जनजाति ‘पहाड़ी कोरवा’ को मिला। शिविर में ही कई पहाड़ी कोरवा परिवारों के नए राशन कार्ड बनाकर उनके हाथों में सौंपे गए। इसके अलावा, बुजुर्गों और जरूरतमंदों को पेंशन स्वीकृति के आदेश भी मौके पर ही वितरित किए गए, जिससे ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।

दस्तावेजों का झंझट खत्म, मौके पर ही बने प्रमाणपत्र

​अधिकारियों ने ग्रामीणों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी और उनकी स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान भी किया। ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए शिविर में ही एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ की तरह काम किया गया:

  • ​ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
  • आधार अपडेट (Aadhaar Update) और नए आयुष्मान कार्ड बनाने का काम युद्ध स्तर पर हुआ।
  • ​आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मौके पर ही ऑनलाइन आवेदन भी दर्ज किए गए।

​जशपुर में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान से यह स्पष्ट है कि प्रशासन अब अंतिम छोर के व्यक्ति तक अपनी पहुंच बनाने के लिए न केवल संकल्पित है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

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