तारापुर गांव के ‘सिद्धि स्व-सहायता समूह’ ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल; बिना केमिकल की 52 मूर्तियां हाथों-हाथ बिकीं, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करेंगी कमाई
बस्तर(14 सितंबर 2026):
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत, कला और लगन के दम पर स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। बकावंड विकासखंड के ग्राम तारापुर की महिलाओं ने इस गणेशोत्सव पर पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार का अनूठा उदाहरण पेश किया है। यहां संचालित ‘मिट्टी के गणेश मूर्ति निर्माण सिद्धि स्व-सहायता समूह’ की दीदियों ने पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) प्रतिमाएं तैयार कर महज कुछ ही हफ्तों के भीतर ₹1.80 लाख की शानदार आय अर्जित की है।
52 मनमोहक प्रतिमाएं, बाजार में आते ही हाथों-हाथ बिकीं
समूह की सदस्य शांति नागवंशी, दसो भारती और रोमा नागवंशी के नेतृत्व में महिलाओं ने स्थानीय शुद्ध मिट्टी से 52 आकर्षक गणेश प्रतिमाएं तैयार की थीं। इन मूर्तियों के निर्माण में किसी भी तरह के प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP), हानिकारक केमिकल या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया। शुद्ध और प्राकृतिक होने के कारण बाजार में आते ही इन इको-फ्रेंडली मूर्तियों की भारी मांग देखने को मिली और देखते ही देखते सारा स्टॉक बिक गया।
“खुद की कमाई से बच्चों की पढ़ाई और परिवार को मिलेगा संबल”
बंपर बिक्री और कमाई से उत्साहित समूह की सदस्य शांति नागवंशी ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा, “अपने हाथों से तराशी गई मूर्तियों की घरों और पंडालों में विधि-विधान से पूजा होते देखना और उससे खुद की आमदनी होना किसी सपने के सच होने जैसा है।” उन्होंने बताया कि इस कमाई का उपयोग वे परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए करेंगी।
जिले भर में सराहना, महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
सीमित संसाधनों के बावजूद तारापुर की महिलाओं की यह पहल पूरे बस्तर जिले में चर्चा और सराहना का विषय बनी हुई है। पर्यावरण की रक्षा के साथ आर्थिक रूप से मजबूत होने का यह मॉडल आसपास के गांवों की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा दे रहा है।
