छत्तीसगढ़ के धुर दक्षिण में स्थित सुकमा जिले से सुशासन की एक बेहद मानवीय और संवेदनात्मक तस्वीर सामने आई है। ‘सुशासन तिहार 2026’ के तहत प्रशासन ने फाइलों और दफ्तरों की चारदीवारी से बाहर निकलकर सीधे उन झोपड़ियों और गलियों का रुख किया, जहाँ सरकारी योजनाओं की सबसे ज्यादा दरकार है।
संवेदनशीलता: जब कलेक्टर और ग्रामीण एक ही जाजम पर आए
छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम हमीरगढ़, जैमेर और पेरमारास में आयोजित विशेष शिविरों में वह दृश्य देखने को मिला, जिसकी कल्पना ग्रामीण क्षेत्रों में कम ही की जाती है। जिला कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने किसी ऊंचे मंच या बंद कमरे के बजाय, इमली और महुआ के पेड़ों के नीचे सजी चौपालों को चुना।
अधिकारी बिना किसी ताम-झाम के ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठे और उनसे आत्मीय संवाद किया। इस ‘द्वार पर दस्तक’ पहल ने न केवल ग्रामीणों का भरोसा जीता, बल्कि शासन और जनता के बीच की दूरी को भी खत्म कर दिया।
योजनाओं की जमीनी हकीकत: कागजों पर नहीं, धरातल पर समीक्षा
चौपाल के दौरान कलेक्टर ने केवल रिपोर्ट नहीं मांगी, बल्कि सीधे हितग्राहियों से सवाल किए:
- नल से जल: जल जीवन मिशन के तहत पानी घर तक पहुँच रहा है या नहीं?
- प्रधानमंत्री आवास: मकान की किश्तें समय पर मिल रही हैं?
- खेती-किसानी: एग्रीस्टेक पंजीयन और बोनस भुगतान की क्या स्थिति है?
- पोषण: आंगनबाड़ी और राशन दुकान से मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता कैसी है?
’ऑन द स्पॉट’ समाधान: दफ्तरों के चक्करों से मिली मुक्ति
शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही समस्याओं का त्वरित निराकरण। विभिन्न विभागों के स्टॉलों पर आवेदन लेते ही उन्हें प्रोसेस किया गया:
- राजस्व मामले: सालों से लंबित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन के मामलों का मौके पर निपटारा।
- दस्तावेज: आय, जाति, निवास और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र हाथों-हाथ बनाकर वितरित किए गए।
- कार्ड अपग्रेडेशन: राशन कार्ड और जॉब कार्ड में सुधार कर उन्हें तुरंत ग्रामीणों को सौंपा गया।
