एमसीबी (छत्तीसगढ़)। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के दूरस्थ अंचल में स्थित ग्राम काशीटोला में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर, ग्राम पंचायत बहारसी के तहत आने वाले इस गांव में ‘हर घर जल’ योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन दे दिए गए हैं। वर्षों से पानी की एक-एक बूंद के लिए जद्दोजहद कर रहे ग्रामीणों को अब घर के आंगन में ही स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल रहा है।
कुओं और हैंडपंपों की लंबी कतारों से मिली मुक्ति
काशीटोला के ग्रामीणों को पहले पीने के पानी के लिए कुओं, हैंडपंपों या दूर-दराज के प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। गर्मी के दिनों में भूजल स्तर गिरने से जल स्रोत सूख जाते थे, जिससे संकट और गहरा जाता था। दूषित पानी पीने की मजबूरी से जलजनित बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता था। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों को होती थी, जिनका अधिकांश समय दूर से पानी ढोने में बीत जाता था और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती थी।
प्रशासन और ग्रामीणों की जुगलबंदी ने रचा इतिहास
जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत बहारसी का चयन होने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE), पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के आपसी समन्वय से गांव में तेजी से पाइपलाइन बिछाई गई। जल स्रोतों के संवर्धन और संरक्षण के साथ गांव में ‘जल एवं स्वच्छता समिति’ गठित की गई। समिति के जरिए पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और व्यवस्था के रख-रखाव की पुख्ता व्यवस्था की गई है। योजना के सफल क्रियान्वयन के चलते काशीटोला अब 100% जल-प्रमाणित गांव बन चुका है।
महिलाओं का समय बचा, स्वास्थ्य में हुआ सुधार
घर तक नल से पानी पहुंचने के बाद गांव के दैनिक जीवन में सीधा और सकारात्मक असर दिखने लगा है:
- बीमारियों पर लगाम: स्वच्छ पेयजल मिलने से जलजनित बीमारियों में भारी गिरावट आई है।
- समय की बचत: महिलाओं को अब मीलों दूर नहीं जाना पड़ता, जिससे वे घरेलू कार्यों और स्वरोजगार से जुड़ पा रही हैं।
- बच्चों की शिक्षा: पानी लाने में समय न गंवाने से बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है।
- सशक्त सामुदायिक भागीदारी: ग्रामीण न केवल योजना का लाभ ले रहे हैं, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण और रख-रखाव की जिम्मेदारी भी खुद संभाल रहे हैं।
काशीटोला आज यह साबित कर रहा है कि यदि सरकारी तंत्र की इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ मिल जाएं, तो दूरस्थ और दुर्गम वनांचलों की तस्वीर भी तेजी से बदली जा सकती है।
