बंदूक की जगह हाथ में ‘आशीर्वाद का दीया’: अबूझमाड़ में हिंसा के अंधेरे से जनसेवा और आत्मनिर्भरता की नई भोर

  • छत्तीसगढ़ शासन की ‘पुनर्वास नीति-2025’ से भटके युवाओं को मिला सम्मान, आजीविका और परिवार का संबल
  • कभी हथियार उठाने वाले हाथों ने जलाए आस्था और सद्भावना के दीप, समाज निर्माण में निभा रहे सक्रिय भागीदारी
  • ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत मुख्यधारा में लौटे युवाओं ने दिया शांति और सामाजिक स्वीकार्यता का सशक्त संदेश

नारायणपुर (18 सितंबर 2026):

छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला और विशेष रूप से अबूझमाड़ का दुर्गम अंचल, जो दशकों तक भय, अशांति और नक्सली हिंसा के साए में जकड़ा रहा, अब सामाजिक परिवर्तन और स्थायी शांति की नई इबारत लिख रहा है। कभी भटकाव की राह पर चलकर जिन हाथों ने बंदूकें थाम रखी थीं, वे हाथ अब राष्ट्र निर्माण और आत्मनिर्भरता का दीप प्रज्वलित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025’ के सकारात्मक प्रभाव अब अबूझमाड़ के बीहड़ों में एक जीवंत सामाजिक क्रांति के रूप में परिलक्षित हो रहे हैं।

कागजी दावों से परे जमीनी स्तर पर दिखा पुनर्वास का असर

राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों ने हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं को केवल हथियार डालने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके लिए सम्मानजनक जीवन, परिवार से पुनर्मिलन और आर्थिक स्वावलंबन के नए अवसर सुनिश्चित किए हैं। प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे आजीविका के साधनों, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा ने इन युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति गहरा विश्वास पैदा किया है। आज नारायणपुर में पुनर्वास की यह प्रक्रिया कागजों से बाहर निकलकर धरातल पर बदलाव की गवाही दे रही है।

‘सेवा संकल्प अभियान’ में आत्मसमर्पित युवाओं ने ली सहभागिता

हिंसा के काले दौर को पीछे छोड़ समाज की मुख्यधारा में जुड़े इन नागरिकों ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जब इन हाथों ने एक साथ दीप प्रज्वलित किए, तो वह दृश्य केवल एक औपचारिक आयोजन न होकर अबूझमाड़ के वनांचल में शांति, सद्भाव और सामाजिक स्वीकार्यता का सशक्त उद्घोष बन गया।

स्थानीय नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनसेवा और सामाजिक आयोजनों में उनकी यह सहभागिता आपसी विश्वास को मजबूत करने के साथ ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को भी नई गति दे रही है। यह सुखद बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब संवेदनशील नीतियां सम्मान, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ती हैं, तो हिंसा का अंधियारा छंटता है और विश्वास की नई भोर जन्म लेती है।

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