बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत भद्रकाली में आज विकास और भरोसे की एक नई तस्वीर देखने को मिली। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ के विजन को अमलीजामा पहनाने के लिए आयोजित ‘सुशासन तिहार’ (जनसमस्या निवारण शिविर) में ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। कोत्तूर, चंदूर, बामनपुर और अर्जुनल्ली समेत करीब आधा दर्जन गांवों के हजारों ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान और योजनाओं का लाभ लेने इस शिविर में पहुँचे।
एक ही छत के नीचे सरकारी तंत्र
शिविर की सबसे खास बात यह रही कि ग्रामीणों को अपने काम कराने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़े। प्रशासन ने 24 अलग-अलग विभागों के स्टॉल एक ही जगह लगाए थे। कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे ने खुद हर स्टॉल पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवेदनों का निराकरण बिना किसी देरी के किया जाए।
”जनता के द्वार पर प्रशासन” – कलेक्टर
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा, “अब जनता को दफ्तर नहीं जाना होगा, बल्कि प्रशासन खुद चलकर आपके द्वार आया है।” उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खाते (DBT) में पाने के लिए बैंक अकाउंट और आधार कार्ड की महत्ता समझाई। साथ ही, उन्होंने श्रमिकों से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने हेतु श्रमिक कार्ड बनवाने की अपील की। इस दौरान उन्होंने उपस्थित जनसमूह को ‘बाल विवाह मुक्त बीजापुर’ बनाने की शपथ भी दिलाई।
शांति और विकास का नया अध्याय
पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने क्षेत्र में बढ़ती शांति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बीजापुर अब नक्सलवाद के साये से बाहर निकलकर विकास की राह पर चल पड़ा है। उन्होंने क्षेत्र की बुनियादी मजबूती के लिए ग्रामीणों से पुलिस और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
शिविर की मुख्य झलकियां:
- महिला एवं बाल विकास: गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया।
- समाज कल्याण: दिव्यांगजनों को व्हील चेयर और वॉकिंग स्टिक जैसे सहायक उपकरण बांटे गए।
- राजस्व एवं अन्य: मौके पर ही जाति प्रमाण पत्र, वनाधिकार पत्र और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ दिए गए।
- स्वास्थ्य: स्वास्थ्य विभाग के कैंप में सैकड़ों लोगों की निःशुल्क जांच हुई और दवाइयां वितरित की गईं।
- मत्स्य पालन: मछुआरों को आईस बॉक्स प्रदान किए गए।
यह शिविर न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का केंद्र बना, बल्कि शासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक भी साबित हुआ।
