रायपुर | 13 सितंबर 2026:
छत्तीसगढ़ की अनूठी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर और जीवंत जनजातीय परंपराओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित नोवोटेल वरुण बीच पर आयोजित भारतीय पर्यटन संचालक संघ (IATO) के 41वें चार दिवसीय वार्षिक सम्मेलन (10 से 13 सितंबर) में छत्तीसगढ़ की विविधतापूर्ण पर्यटन क्षमताओं का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।
‘भारत: विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ थीम पर आधारित इस महासम्मेलन में देशभर के पर्यटन विभागों, प्रमुख टूर ऑपरेटरों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।
केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल अध्यक्ष सम्मानित
सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री कंदुला दुर्गेश और विशेष मुख्य सचिव श्री शमशेर सिंह रावत सहित देश के शीर्ष पर्यटन प्रतिनिधि शामिल हुए।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने विशेष सहभागिता की। उन्होंने विभिन्न विचार-सत्रों में प्रदेश के पर्यटन विजन को मजबूती से रखा और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के अनछुए पर्यटन स्थलों को प्रमोट करने की कार्ययोजना साझा की। सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय मंच पर उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया।
जलप्रपात, इतिहास और जनजातीय जीवन का अद्भुत समन्वय
सम्मेलन के दौरान रेखांकित किया गया कि छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, इतिहास, अध्यात्म और जनजातीय जीवन का एक दुर्लभ संगम है:
- प्राकृतिक वैभव: बस्तर के विहंगम जलप्रपात (चित्रकोट, तीरथगढ़) और घने साल वन।
- इतिहास और पुरातत्व: सिरपुर जैसी प्राचीन बौद्ध व सनातन कालीन पुरातात्विक धरोहरें।
- धार्मिक आस्था: माँ दंतेश्वरी की पावन धरा दंतेवाड़ा और प्राचीन मंदिर श्रृंखलाएं।
- सांस्कृतिक विविधता: समृद्ध लोक कलाएं, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्सव, जो इसे अन्य राज्यों से अलग पहचान दिलाते हैं।
B2B बैठकों से खुले साझेदारी और निवेश के नए रास्ते
सम्मेलन के दौरान 11 और 12 सितंबर को ‘भारतीय पर्यटन मेला’ आयोजित हुआ। इसमें विभिन्न राज्यों के टूर ऑपरेटरों और छत्तीसगढ़ पर्यटन प्रतिनिधियों के बीच बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें हुईं। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र स्थानीय समुदायों (होमस्टे व रूरल टूरिज्म) को जोड़कर रोजगार सृजित करना, नए सर्किट तैयार करना और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए सुरक्षित व सुगम यात्रा पैकेज विकसित करना रहा।
विशाखापट्टनम में मिले इस राष्ट्रीय मंच के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले पर्यटन सत्र में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म और कल्चरल टूरिज्म को एक नई रफ्तार मिलेगी।
वैकल्पिक सुर्खियां (Headlines):
- विशाखापट्टनम में IATO सम्मेलन: राष्ट्रीय पटल पर छाया छत्तीसगढ़, बस्तर से सिरपुर तक की पर्यटन संभावनाओं पर हुआ मंथन
- 41वां IATO वार्षिक सम्मेलन: छत्तीसगढ़ के पर्यटन विजन को मिला राष्ट्रीय मंच, अध्यक्ष नीलू शर्मा हुए सम्मानित
- ग्लोबल टूरिज्म मैप पर चमकने को तैयार छत्तीसगढ़: IATO सम्मेलन में गूंजी बस्तर और सिरपुर की विरासत
