जशपुर। ग्रामीण अंचलों में आजीविका को सुदृढ़ करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में वन विभाग और एफ.ई.एस. (FES) ने एक सराहनीय पहल की है। वन परिक्षेत्र जशपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम ठुठीअम्बा में ग्रामीणों और स्थानीय कृषकों के लिए ‘कुसमी लाख पालन’ विषय पर एक दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक रूप से लाख का उत्पादन कर रहे किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से रूबरू कराना था।
इस प्रशिक्षण शिविर में ठुठीअम्बा सहित आस-पास के कई गाँवों के लगभग 100 से अधिक परिवारों के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गौरतलब है कि इस क्षेत्र के किसान पीढ़ियों से लाख पालन का कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में अब तक वे पुरानी और अवैज्ञानिक पद्धतियों पर ही निर्भर थे, जिससे मेहनत के मुकाबले मुनाफा कम होता था। इसी खाई को पाटने के लिए विशेषज्ञों ने किसानों को नई तकनीकों की बारीकियां समझाईं।
विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जिला यूनियन के सहायक प्रबंधक श्री मुकेश साय पैंकरा और सुश्री दीक्षा कुमारी रहे। दोनों विशेषज्ञों ने किसानों को लाख पालन से जुड़े हर छोटे-बड़े तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- लाख बिहन (बीज) का उपचार: संक्रमण से बचाने और बेहतर गुणवत्ता के लिए बीज का सही उपचार कैसे करें।
- पेड़ों में संचरण की सही विधि: किस मौसम में और किस तरीके से लाख के कीड़ों को पेड़ों पर छोड़ा जाए ताकि अधिकतम उत्पादन मिले।
- कीटनाशक और फफूंदीनाशक का सटीक उपयोग: फसल को नुकसान से बचाने के लिए रसायनों की सही और संतुलित मात्रा का इस्तेमाल।
ग्रामीणों में दिखा नया उत्साह, स्वरोजगार को मिलेगा बल
इस नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जानने के बाद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के बीच भारी उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों का मानना है कि इन आधुनिक तकनीकों को अपनाकर न सिर्फ लाख की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि उत्पादन में भी भारी बढ़ोतरी होगी। चूंकि लाख पालन इस क्षेत्र के लोगों के लिए आय का एक मुख्य और रोजगारमूलक जरिया है, इसलिए इस पहल से उनकी आर्थिक स्थिति और आजीविका मजबूत होने की पूरी उम्मीद है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में भी इस तरह के व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि वनांचल के अधिक से अधिक ग्रामीणों को स्वरोजगार और वैज्ञानिक कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर मुख्यधारा में लाया जा सके।
