जशपुर में किसानों की किस्मत बदल रही ‘नाशपाती’ की मिठास: 5 एकड़ में खेती कर अनिल एक्का ने गढ़ी सफलता की कहानी

जशपुर के सन्ना क्षेत्र में किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फलों की बागवानी कर रहे हैं। शासन और नाबार्ड की मदद से केराकोना गांव के अनिल एक्का ने नाशपाती की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। आज उनके खेतों की नाशपाती की मांग प्रदेश के बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों तक पहुँच गई है।

जशपुर में कल सजेगा ‘सुशासन तिहार’: सरबकोम्बो और अमडीहा में जुटेंगे 28 गांवों के लोग, ऑन-द-स्पॉट होगा समस्याओं का निपटारा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जशपुर जिले में कल बड़े जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन होने जा रहा है। बगीचा और फरसाबहार जनपद के इन शिविरों में ग्रामीणों की मांगों और शिकायतों का मौके पर ही प्रभावी समाधान किया जाएगा।

जशपुर: ‘सुशासन तिहार’ से बदली टांगरडीह की सूरत; एक ही छत के नीचे निपटे 143 मामले, 25 किसानों के हाथों में आई ‘समृद्धि की किताब’

जशपुर जिले के बगीचा विकास खंड अंतर्गत ग्राम टांगरडीह में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर (सुशासन तिहार) का आयोजन किया गया। शिविर में ग्रामीणों की उम्मीदों को पंख देते हुए जहाँ मौके पर ही 143 आवेदनों का निपटारा किया गया, वहीं 25 किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड और फलदार पौधे बांटकर उन्हें आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई गई।

बलौदाबाजार: जब ‘सुशासन तिहार’ में मुखिया ने खुद नन्हे बच्चों को चखाया पहला निवाला, गर्भवती माताओं की गोदभराई कर दिया सुखद भविष्य का आशीष

बलौदाबाजार के करहीबाजार में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का एक बेहद मानवीय और आत्मीय रूप देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल का रुख कर जहाँ छोटे बच्चों को अपने हाथों से अन्नप्राशन कराया, वहीं गर्भवती महिलाओं को उपहार भेंट कर उनके सुरक्षित मातृत्व की कामना की।

जशपुर के बड़ाकरौंजा में कल सजेगा ‘सुशासन तिहार’: 15 गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर होगा त्वरित निपटारा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर में जनसमस्या निवारण के लिए ‘सुशासन तिहार 2026’ का आयोजन।
​23 मई को जनपद पंचायत जशपुर के ग्राम बड़ाकरौंजा में लगेगा वृहद शिविर, कलेक्टर रोहित व्यास ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी।
​बड़ाकरौंजा, घोलेंग, बघिमा और जशपुर सहित 15 गांवों के ग्रामीण सीधे जिला प्रशासन के सामने रख सकेंगे अपनी मांगें और शिकायतें।

धसमा में अवैध रेत खनन का सच: ग्रामीणों ने कहा—‘रोज 50 ट्रैक्टर नहीं, पीएम आवास के लिए अपनी नदी से लाए थे रेत’

जशपुर के धसमा में ‘अवैध रेत खनन’ के दावों पर ग्रामीणों और प्रशासन की जांच में बड़ा खुलासा। रोज़ाना 50 ट्रैक्टर रेत निकालने की बात निकली अफवाह, खुद के आशियाने के लिए ग्रामीणों ने निकाली थी रेत।

जशपुर: दुलदुला स्वास्थ्य केंद्र में सिकल सेल मरीजों के लिए विशेष शिविर, शादी से पहले ‘सिकल कुंडली’ मिलाने और योग अपनाने की दी गई सलाह

जशपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुलदुला में आयोजित ‘पीयर सपोर्ट मीटिंग’ में सिकल सेल मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर स्वास्थ्य सलाह दी गई। डॉक्टरों ने भीषण गर्मी में बचाव के तरीकों के साथ-साथ शादी से पहले सिकल सेल जांच (कुंडली मिलान) की अनिवार्यता पर जोर दिया।

जशपुर के ठुठीअम्बा में ग्रामीणों ने सीखे कुसमी लाख पालन के गुर, बढ़ेगी आमदनी, परंपरागत खेती से वैज्ञानिक तकनीक की ओर

जशपुर वन परिक्षेत्र के ठुठीअम्बा गाँव में FES और वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।
​करीब 100 किसान परिवारों ने लिया हिस्सा; पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़ अब वैज्ञानिक पद्धति से करेंगे लाख का उत्पादन।
​लाख बिहन (बीज) उपचार से लेकर कीट-फफूंद नियंत्रण की मिली बारीकी से जानकारी।

जशपुर के गांवों में ही मिलेंगी 400+ सरकारी सुविधाएं,अब छोटे कामों के लिए नहीं काटने पड़ेंगे जिला मुख्यालय के चक्कर

​जशपुर जिले के दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब उन्हें विवाह पंजीकरण या भवन निर्माण की एनओसी (NOC) जैसे कामों के लिए ब्लॉक या जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। ‘सेवा-सेतु पोर्टल’ (e-District 2.0) के जरिए 400 से ज्यादा डिजिटल सरकारी सेवाएं अब सीधे उनके ग्राम पंचायत के ‘लोक सेवा केंद्र’ पर ही उपलब्ध होंगी।

जशपुर का बगिया बनेगा स्मार्ट सिंचाई का राष्ट्रीय मॉडल, अंडरग्राउंड पाइप और IoT तकनीक से बुझेगी 13 गांवों के खेतों की प्यास

अब जशपुर के किसानों को सिंचाई के लिए सिर्फ बारिश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। जिले के कांसाबेल ब्लॉक में करीब 119 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक एम-कैड (M-CAD) सिंचाई योजना आकार ले रही है। देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 प्रोजेक्ट्स में छत्तीसगढ़ का यह इकलौता मॉडल है, जहां सौर ऊर्जा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक तय करेगी कि खेतों को कब और कितना पानी चाहिए।